शिव के रहते कैसी चिंता…♥️
महादेव का मनन करें, जन कल्याण से जुड़ें 🍃
रिमझिम फुहारें, चारों ओर हरियाली, बम भोला की गूंज और नृत्य करता मन मयूर…बताने की जरूरत नहीं कि सावन का महीना आ गया। पर्यावरण और अध्यात्म दोनों ही वजह से सावन का विशेष महत्व है। सांस्कृतिक विरासत के तौर पर भी ये महीना समृद्ध है। वैसे तो सावन की महत्ता बताने के लिए कई कहानियां हैं। सभी कहानियों का सार यही है कि सावन महीना पूर्णतया भगवान शिव की आराधना का महीना है। हर कोई देवों के देव को प्रसन्न करने का प्रयास करता है। कावड़ यात्रा निकलती है। कावड़ यात्रा का अाध्यात्मिक आशय शिव के साथ विहार करना है। भगवान शिव के साथ विहार का सौभाग्य उसी को मिलता है, जो सात्विकता और संयम नियम का पालन करे। हालांकि, कोरोना के कारण फिलहाल कावड़ यात्रा नहीं कर सकते, पर शिवोपासना के तरीके अनेक हैं। उपासना का सही अर्थ यही है कि हम अपने आराध्य देव के गुणों को भी आत्मसात करने का प्रयास करें। उनके गुणों को अंगीकार करने से बचेंगे तो प्रभु की कृपा कैसे प्राप्त करेंगे। सावन माह में कल्याणकारी स्वरूप में पूजे जाने वाले एक मात्र लोक देवता महादेव, जो प्रत्येक शिव भक्त को कल्याणकारी रूवरूप की प्रेरणा देने वाले हैं। चातुर्मास में जब भगवान विष्णु शयन के लिए चले जाते हैं, तब भोले भंडारी तीनों लोकों की सत्ता संभालते हैं। इस पवित्र माह में शिव जी ने कामदेव को भस्म किया था। सावन में ही गंगा का अवतरण शिव की जटाओं के माध्यम से संभव हुआ था। इसी माह में संपूर्ण जगत कल्याण के लिए समुद्र मंथन से निकले विष को पी लिया था और नीलकंठ कहलाए। शिव तत्व ही सत्य है, कल्याणकारी है और सुंदर भी है। शिव प्रकृति में रमने वाले देव हैं। प्रकृति के तीनों तत्वों को सत, तम और रज को धारण करने वाले, करुणावतार हैं। हमें भी प्रकृति से प्रेम करना आना चाहिए। इस माह में अनेक व्रत और त्योहार पड़ते हैं। ये पर्व हमें प्रकृति के करीब भी ले जाते हैं, जैसे हरियाली तीज। पर्यावरण की दृष्टि से भी हरियाली तीज का विशेष महत्व है। इस दिन पौधारोपण के अभियान भी चलाए जाते हैं। ये शिव उपासना के साथ ही पर्यावरण रक्षा का संकल्प लेने का भी महीना है। ये संयम का भी महीना है। खासकर खानपीन का संयम। धार्मिक कारणों के अलावा वैज्ञानिक दृष्टि से भी इन दिनों तामसिक भोजन जैसे मांस-मदिरा का सेवन हानिकारक होता है। संयमित रहें, भक्ति भाव के साथ कल्याणकारी कार्यों को भी संपादित करें। यही भगवान शिव की सबसे बड़ी पूजा होगी। इस कल्याण की संस्कृति को जन कल्याण से जोड़े और शिव का मनन करें।
(दुर्गा शर्मा, लखनऊ)
